Author(s):
भुवनलाल टाण्डेकर, वैशाली यादव
Email(s):
btandekar@gmail.com
DOI:
10.52711/2454-2679.2026.00020
Address:
भुवनलाल टाण्डेकर1, वैशाली यादव2
1शोधार्थी, अर्थशास्त्र, मध्यांचल प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत।
2सहायक प्राध्यापक, अर्थशास्त्र विभाग, मध्यांचल प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भोपाल, मध्य प्रदेश, भारत।
*Corresponding Author
Published In:
Volume - 14,
Issue - 2,
Year - 2026
ABSTRACT:
भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो गई हैं। इसमें भारतीय बैंकिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। आधुनिक बैंकिंग सेवाओं का इतिहास 200 वर्ष पुराना हैं। भारत के आधुनिक बैंकिंग की शुरुआत ब्रिटिश राज्य में हुई हैं। यहां प्रारंभ में बैंकों की शाखाएं और उनका कारोबार वाणिज्य केंद्रों तक ही सीमित होता था। स्वतंत्रता के उपरांत भारतीय रिजर्व बैंक को केंद्रीय बैंक का दर्जा बनाये रखने के लिये उसे बैंकों का बैंक घोषित किया गया। समस्त प्रकार की मौद्रिक नीतियों को लागू करने और उसे अन्य बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा लागू कराने का दायित्व भी उसे सौंपा गया। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक की नियंत्रण तथा नियम शक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही हैं। बैंकों ने सदियों से अर्थव्यवस्था और राजनीति को प्रभावित किया हैं। बैंकिंग उद्योग व्यापारों के साथ या उपभोक्ताओं के लिए नहीं वाणिज्यक उधार आज एक बहुत ही गहन विधि हैं। विभिन्न प्रकार की आवश्यकता और देश के विकास में बैंकों की भूमिका हैं। जो विभिन्न सेवाओं और देश की अर्थव्यवस्था के विकास में सहायता करते हैं। किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में बैंक की व्यवस्था का अध्ययन महत्वपूर्ण स्थान होता हैं। बैंक मुद्रा बाजार के सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग के रूप में देश के आर्थिक विकास के महत्वपूर्ण उपकरण होते हैं। पूंजी निर्माण व्यापार उद्योग एवं कृषि के अर्थ प्रबंधन तथा देश की आर्थिक सामाजिक नीतियों एवं कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में उनकी भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कार्यो व जनता को वित्तीय सहायता प्रदान कर आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
Cite this article:
भुवनलाल टाण्डेकर, वैशाली यादव. भारत में व्यावसायिक बैंकिंग प्रणाली का आर्थिक विकास में महत्व: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के संदर्भ में एक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):91-6. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00020
Cite(Electronic):
भुवनलाल टाण्डेकर, वैशाली यादव. भारत में व्यावसायिक बैंकिंग प्रणाली का आर्थिक विकास में महत्व: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के संदर्भ में एक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):91-6. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00020 Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-2-5
संदर्भ:-
1. SBI वार्षिक रिपोर्ट (2021-2025)
2. आर्थिक समाचार रिपोर्ट (GDP और बैंकिंग योगदान)
3. CAMELS आधारित अध्ययन (Reddit स्रोत)
4. SBI क्रेडिट वृद्धि रिपोर्ट
5. साइबर फ्रॉड रिपोर्ट
6. हेतलता शाक्य - भारत के आर्थिक विकास में बैंको की भूमिका, Inspira-Journal of Commerce, Economics & Computer Science (JCECS) 1ISSN: 2395-7069 COSMOS Impact Factor: 4.964, Volume 06, No. 01, January-March, 2020, pp. 173-176
7. डॉ. भैया लाल- भारत के केन्द्रीय बैंक और वाणिज्यिक बैंक: एक समीक्षात्मक अध्ययन, International Journal of Research in Economics and Social Sciences (IJRESS) Available online at: http://euroasiapub.org Vol. 8 Issue 12, December- 2018 ISSN(o): 2249-7382 | Impact Factor: 6.939
8. Bhadrappa Haralayya1 (2021) P- S- Aithal A Study On Structure and Growth of Banking Industry in India, The results of these indicators are corroborated with the studies of Bhatia, International Journal of Research in Engineering, Science and Management Volume 4, Issue 5, May 2021 https://www.ijresm.com | ISSN (Online): 2581-5792
9. एस बी आई के पाँच सहयोगी थे-स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर और जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, इनका विलय इसमें 1 अप्रैल 2017 से कर दिया गया।