Author(s): Vrinda Sengupta, Ku. Vandana Panday, Jitendra Dewangan

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Address: Dr. (Mrs.) Vrinda Sengupta1*, Ku. Vandana Panday2, Jitendra Dewangan3 1Asstt.Prof. (Sociology), Deptt.of Sociology, Govt.T.C.L.P.G. College, Janjgir (C.G.) 2Asstt. Prof., Govt.T.C.L.P.G. College, Janjgir (C.G.) 3Student, Govt.T.C.L.P.G. College, Janjgir (C.G.) *Corresponding Author

Published In:   Volume - 3,      Issue - 3,     Year - 2015


ABSTRACT:
किसी भी क्षेत्र या जाति के विकास में उनकी प्रतिमान संचालित योजनाएँ एवं जनाँकिकीय विशेषताएँ महत्वपूर्ण स्थान रखती है, क्योंकि उसी के आधार पर शासकीय नीतियाँ तैयार की जाती है। छ.ग. की जनसंख्या का 2001 में 31.76 प्रतिशत् अनुसूचित जनजाति है। ये जनजातियाँ मुख्यतः कोरिया, जाँजगीर-चाम्पा, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, बस्तर, दंतेवाड़ा, काँकेर, नारायणपुर, बीजापुर आदि जिलों में रहते हैं। ये जनजातियाँ रूढ़ियों एवं परम्पराओं से बँधे होते हैं। इन्हें विकास की धारा से जोड़ना आसान कार्य नहीं है। इन जनजातियों में मुख्य गोंड़, कँवर, कोरवा, बिरहोट, उराँव, खैरवार, बिंझवार, कंमार, खांड़िया, मुड़िया, पटवा, हलवा, अबुझमाड़िया, सबरिया प्रमुख हैं। ये जनजातियाँ मुख्यतः स्त्री साक्षरता में पिछड़े हुए हैं। इनकी 89.2 प्रतिशत् जनसंख्या काश्तकार एवं कृषि में संलग्न हैं, जो काफी पिछड़े हुए हैं। राज्य के विकास के लिए आवश्यक है कि इन्हें विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जाए। स्वतंत्रता के पश्चात् भारत सरकार ने जनजातियों की सभ्यता एवं संस्कृति को अक्षुण्ण रखते हुए विकास योजनाएँ क्रियान्वित किए हैं इन योजनाओं के फलस्वरूप जनजातियों का आर्थिक विकास तेज गति से हुआ है। जाँजगीर-चाम्पा जिला में निवासरत् सबरिया जनजाति की अपनी विशेषता है जनजाति समाज आज बदलाव के दौर से गुजर रहा है।


Cite this article:
Vrinda Sengupta, Ku. Vandana Panday, Jitendra Dewangan. अनुसूचित जनजाति के बदलते प्रतिमान एवं अनुसूचित क्षेत्रों में संचालित योजनाएँ (जिला: जाँजगीर-चाम्पा के ग्राम पेण्ड्री सबरिया जनजाति के विशेष संदर्भ मंे). Int. J. Ad. Social Sciences 3(3): July- Sept., 2015; Page 118-120.


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