Author(s): कंचन सोंधिया

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DOI: 10.52711/2454-2679.2026.00021   

Address: कंचन सोंधिया
शोधार्थी (वाणिज्य), शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा (म0प्र0)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 14,      Issue - 2,     Year - 2026


ABSTRACT:
प्राचीन काल से ही भारत कृषि प्रधान देश रहा है। उस समय देश में विस्तृत कृषि पद्धति प्रचलित थी। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में स्वावलम्बी थे। जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि होने के कारण स्वतंत्रता के समय से ही खाद्यान्नों की कमी प्रतीत होना शुरू हुई। खाद्यान्नों का भारी मात्र में प्रतिवर्ष आयात किया गया। इसलिए देश में खाद्यान्नों के उत्पादन में वृद्धि करने के लिए विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं में कृषि विकास को प्राथमिकता दी गई। कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में विभिन्न वित्तीय संस्थानों का महत्वपूर्ण स्थान है। यह संस्थान किसानों को ऋण बीमा और अन्य वित्तीय सहायता प्रदान करके कृषि क्षेत्र को मजबूत करते है। हमारे देश में लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कार्य पर निर्भर है।1 लेकिन कृषकों को वर्ष पर्यन्त कार्य नहीं मिल पाता अतः इस दृष्टि से रीवा जिले में ही नहीं वरन् भारत में कृषि उत्पादन में वित्तीय संस्थानों का योगदान है।


Cite this article:
कंचन सोंधिया. रीवा जिले के कृषि उत्पादन में वित्तीय संस्थानों का योगदान (रीवा जिले विशेष संदर्भ में). International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):97-1. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00021

Cite(Electronic):
कंचन सोंधिया. रीवा जिले के कृषि उत्पादन में वित्तीय संस्थानों का योगदान (रीवा जिले विशेष संदर्भ में). International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(2):97-1. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00021   Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-2-6


संदर्भ ग्रंथ सूची :-
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6. राष्ट्रीय बैंक नावार्ड ग्रामीण ऋण के क्षेत्र में राष्ट्रीय बैंक की भूमिका राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण बैंक 1992
7. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, स्टार समाचार, पत्रिका, नवभारत
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9. इन्टरनेट वेवसाइट:-
10. www.google.com
11. http://www.bbc.com/hindi/india- 39971584

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