Author(s): डा- अर्चना सेठी

Email(s): archanasethi96@gmail.com

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Address: डा- अर्चना सेठी
सहायक प्राध्यापकए अर्थशास्त्र अघ्ययनशालाए प्ं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालयए रायपुर
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 5,      Issue - 1,     Year - 2017


ABSTRACT:
आर्थिक विकास अनेक तत्वों से प्रभावित होता है जनसंख्या उनमें से प्रमुख तत्व है। किसी प्रदेश में जनसंख्या के वितरण में विभिन्नतायें पायी जाती है, जनसंख्या वितरण प्रारूप न सिर्फ मनुष्य के किसी क्षेत्र विषेष में निवास संबंधी अभिरूची एवं विरूची का द्योतक होता है, अपितु क्षेत्र में कार्यरत भौगोलिक कारणों के संश्लेषण का स्पष्ट प्रदर्शन भी होता है। क्षेत्रीय विकास के साथ जनसंख्या उस ओर आकर्षित होती है जहां औद्योगीकरण एवं नगरीकरण होता है। जनसंख्या के वितरण प्रतिरूप पर सामाजिक आर्थिक कारण लिंगानुपात जन्म दर मृत्यु दर एवं प्रवास प्रभाव डालते है। जलवायु, भैगोलिक स्थिति, उच्चावचन, फसलों की प्रकृति, मिट्टी की उर्वरता आदि भी जनसंख्या वितरण को प्रभावित करते है। लिंगानुपात से किसी क्षेत्र के विकास के स्तर का ज्ञान हो सकता है, अधिक विकसित देशों में लिंगानुपात अधिक होती है, तथा पिछड़े देशों में लिंगानुपात कम होती है।जनसंख्या घनत्व एवं आथर््िाक विकास में कोई सीधा संबंध नहीं हैे। मैदानी क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व अधिक एवं पहाडी तथा वन क्षेत्र में जनसंख्या घनत्व कम है।मैदानी क्षेत्र में औद्योगीकरण अधिक होना भी अधिक घनत्व का कारण है। जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ की 76ण्76 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है जो कृषि कार्य में संलग्न है। है। जिसकी आधी लगभग महिला है। राज्य के विकास के लिए महिलाओं का विकास आवश्यक है। राज्य की 32 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति है राज्य के विकास के लिए उनका भी विकास प्रथम आवश्यकता है। जनगणना 2011 के अनुसार छत्तीसगढ की 76ण्76 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण है जो कृषि कार्य में संलग्न है। राज्य के विकास के लिए कृषि का भी विकास अनिवार्य है। छत्तीसगढ की 70ण्28 प्रतिशत जनसंख्या साक्षर हैं। पुरुषों का 80ण्27 एवं महिलाओं का 60ण्24 जनसंख्या साक्षर है। पुरुष महिला साक्षरता अंतराल 20ण्03 प्रतिशत है विकास के लिए इस अंतराल को समाप्त करना अनिवार्य है।


Cite this article:
डा- अर्चना सेठी. छत्तीसगढ के जिलों की जनांकिकीय प्रवृतियां एवं आर्थिक विकास पर प्रभाव. Int. J. Ad. Social Sciences. 2017; 5(1):39-47.


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