Author(s): तुलाराम ठाकुर,

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Address: तुलाराम ठाकुर, शोध छात्र, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छ.ग.)

Published In:   Volume - 4,      Issue - 3,     Year - 2016


ABSTRACT:
किसी भी राज्य के विकास की गति एवं प्रकृति स्पष्टतः उस राज्य के संसाधनों की मात्रा पर निर्भर करता है। यह संसाधन विकास की सीमा ही निर्धारित नहीं करते अपितु यह भी निर्धारित करते हंै कि विकास किन दशाओं में किया जाए। छत्तीसगढ़ राज्य में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है जिसमें खनिज एक प्रमुख संसाधन है। इतनी विशाल सम्पदा उपलब्ध होनें के बाद भी प्रदेश आर्थिक रूप से सम्पन्न नहीं हैं। इस आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए तीव्र औद्योगिकीकरण ही एक मात्र विकल्प हैं क्योंकि खनिज आधारित उद्योगों की स्थापना से अधिक से अधिक लोगों को रोजगार मिल सकेगा। प्रदेश के विकास हेतु सर्वोच्च प्राथमिकताएं सुदूर आदिवासी क्षेत्र हंै और लगभग सभी प्रमुख खनिज इन्हीं क्षेत्रों में पाये जाते हंै तात्पर्य यह है कि इस सुदूर क्षेत्रों में उपलब्ध खनिजों का यदि उचित दोहन किया जाये तो उनका विकास स्वतः ही होगा। रोजगार के नये अवसर भी उपलब्ध होंगे तथा क्षेत्र का सामरिक आर्थिक विकास होगा।


Cite this article:
तुलाराम ठाकुर, . छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में खनिज संसाधनों की भूमिका (खनिज संसाधन के जरिये राज्य के आर्थिक विकास में सुधार). Int. J. Ad. Social Sciences 4(3): July- Sept., 2016; Page 143-148.

Cite(Electronic):
तुलाराम ठाकुर, . छत्तीसगढ़ के आर्थिक विकास में खनिज संसाधनों की भूमिका (खनिज संसाधन के जरिये राज्य के आर्थिक विकास में सुधार). Int. J. Ad. Social Sciences 4(3): July- Sept., 2016; Page 143-148.   Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2016-4-3-3


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