ABSTRACT:
प्रस्तुत शोध पत्र भदोही जनपद में कृषि विकास एवं पर्यावरण से सम्बन्धित है। अध्ययन क्षेत्र मुख्यतः प्रवाह प्रणालियों में गंगा वेसिन के अनुकूल उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व दिशा में प्रवाहित होने वाली नदियों द्वारा निर्मित मैदान के उपजाऊ भू-भाग में होने के कारण जनपद में उपजाऊ एवं जलोढ़ मिट्टी पायी जाती है। प्राचीन समय में कृषि परम्परागत यंत्रो से की जाती थी, जिसमें समय अधिक लगता था, लेकिन किसी प्रकार की पर्यावरणीय या पारिस्थितिकी की समस्या उत्पन्न नहीं होती थी। परंतु जनसंख्या की अतिशय वृद्धि के साथ-साथ खाद्यान्न की समस्या भी उत्पन्न होने लगी, जिससे कृषि में अधिक उत्पादन हेतु नये-नये प्रयोग किये जाने लगे। जिसका प्रभाव हमारे पर्यावरण और परिस्थितिकी असंतुलन की समस्या उत्पन्न होती जा रही है, जिसके अन्तर्गत कृषक अपने खेत में जैविक एवं अजैविक घटकों (पर्यावरण) में संतुलन रखते हुए कृषि कार्य करता है। खेत स्वयं एक पूर्ण परिस्थितिकी तंत्र है। खेत में पौधें, जीवाणु, कवक, जीव-जन्तु जैव कारक है एवं खनिज, लवण, प्राकृतिक एवं कृत्रिम खाद तथा अन्य रसायन अजैविक घटक है। ये दोनों घटक परस्पर प्रतिक्रिया करते हैं एवं जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो कृषि भूमि प्रदूषित होने लगती है। वर्तमान समय में नये-नये प्रयोग से इसमें और वृद्धि हुई है।
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उमेश कुमार मिश्र. कृषि विकास एवं पर्यावरण प्रदूषण: भदोही जनपद का एक प्रतीक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2021; 9(3):154-9.
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उमेश कुमार मिश्र. कृषि विकास एवं पर्यावरण प्रदूषण: भदोही जनपद का एक प्रतीक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2021; 9(3):154-9. Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2021-9-3-7
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