Author(s): रामनरेश कुशवाहा

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Address: रामनरेश कुशवाहा
शोधार्थी (भूगोल), शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा (म.प्र.)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 8,      Issue - 4,     Year - 2020


ABSTRACT:
प्रस्तुत शोध पत्र मध्यप्रदेश के सतना जिले की अनु. जनजातियो की जनसंख्या का वितरण व संकेन्द्रण के संदर्भ में हैं। भारतीय संविधान के 16वें भाग में कुछ विशेष समुदायो का उल्लेख किया गया है। संविधान के अनुच्छेद की धारा-330 में अति विशेष वर्गो की सुविधाओ का वर्णन किया गया है, जिन्हे अनु. जनजाति कहा गया है, इन जनजातियो का भारतीय इतिहास में प्रमुख स्थान रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था मे इनका वितरण व सकेन्द्रण महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यह आदिम युगीन जनजातियाॅ प्राचीन भारतीय संस्कृति व सभ्यता को समेटे हुए है। इन्हे आदिम जातियाॅ, जनजातियाॅ, वनवासी आदि नामो से जाता है। वर्तमान में भी जनजाति वर्गो का अधिकतर समूह बीहड़ जंगलो में निवासरत है, जो सांसारिक वैभव तथा विलासता से दूर अभाव ग्रस्त जीवन व्यतीत कर रही है।


Cite this article:
रामनरेश कुशवाहा. सतना जिले मंे जनजाति जनसंख्या का वितरण व संकेन्द्रण: एक भौगोलिक अध्ययन. Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):187-190.


संदर्भ ग्रंथः-
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4.    शर्मा, के.के. (2009) ‘‘अनुसूचित जनजातियों में सांस्कृतिक परिवर्तन’’ शोध पत्र , समाज वैज्ञनिकी, प.ृ.25
5.    तिवारी शिवकुमार व शर्मा, कमल (1994) ‘मध्यप्रदेश की जनजातियाॅ एवं समाज व्यवस्था’ पृ. 24।
6.    जनजातीय पर्यावरण सी.पी. तिवारी पृष्ठ क्र. 14
7-    Murdock G.P. Our Primitive Contem Pararies Macmillan New York 1961.
8-    Shriakant mic- Classification of Tribes, Tribal Soveniers – P-13
9.    जिला सतनाः सांख्यिकी पुस्तिका-2011।

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