Author(s): रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी, सोयेबा सना अंसारी

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Address: डाॅ. रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी1, सोयेबा सना अंसारी2
1प्राध्यापक (वाणिज्य), शासकीय टी.एस.एस. महाविद्यालय, नईगढ़ी, जिला रीवा (म0प्र0).
2शोधार्थी (वाणिज्य), शास. टी.आर.एस. महाविद्यालय रीवा (म.प्र.).
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 8,      Issue - 4,     Year - 2020


ABSTRACT:
जीवन बीमा का सम्बन्ध मानव जीवन में घटित होने वाली उन आकस्मिक घटनाओं की भरपाई से है जो बीमा धारक को आर्थिक क्षति से संरक्षण प्रदान करती है, बीमा जोखिम से सुरक्षा एवं भविष्य में सुनहरी बचत में लाभ प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण कारक है। प्रायः एक साधारण परिवार को अपनी दैनिक आवश्यकताओं जैसे रोटी, कपड़ा एवं मकान के लिए परिवार के कर्ता या मुखिया को निरन्तर प्राप्त होने वाली आय पर ही निर्भर रहना पड़ता है। जब तक कर्ता जीवित है उसकी आय भी जीवित है और परिवार की आवश्यकताएॅ भी पूरी होती रहेंगी, परन्तु यदि दुर्भाग्यवश कर्ता को मृत्यु ने अचानक उठा लिया तो परिवार को आर्थिक कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा। कितने ही परिवारों की दशा ऐसे समय में बडी दयनीय हो जाती है। वास्तव में बीमें का अर्थ जोखिम से सुरक्षा और भविष्य के लिए बचत है। इन दो तथ्यों को ध्यान में रखकर बीमाधारक एक निश्चित समयावधि तक प्रीमियम के रूप में अपने अंशदान की अदायगी करता है। बीमाधारक द्वारा अदा किया गया प्रीमियम मृत्यु को टालता नहीं है अपितु उत्तराधिकारियों की जो कि मृतक पर आश्रित थे एक आर्थिक मदद ळें बीमा व्यावसाय सही मायनों में एक ‘‘करार’’ या ‘‘अनुबंध’’ है जो बिमा कम्पनियों एवं बीमा धारक के बीच होता है। अनुबन्ध के अनुसार, बीमा पाॅलिसी अवधि शुरू होने से परिपक्वता अवधि आने के बीच यदि बीमाधारक कि आकस्मिक या दुर्घटनाग्रस्त मृत्यु हो जाती है तो बीमा कम्पनियाॅ मृत बीमा धारक के उत्तराधिकारी को उचित बीमा दावा के रूप में धन प्रदान करेगी। इसी तरह किसी कारणवश बीमा धारक का शरीर अंग-भंग हो जाए और वह विकलांगता की श्रेणी में आ जाए तो ऐसी स्थिति में भी दावा प्रक्रिया में धन प्रदान किया जाएगा। बीमे का वास्तविक स्वरूप जोखिम सुरक्षा है।


Cite this article:
रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी, सोयेबा सना अंसारी. जीवन बीमा कम्पनियों में ग्राहक संतुष्टि-भारतीय जीवन बीमा निगम एवं बजाज एलियांज का तुलनात्मक अध्ययन (रीवा जिले के विशेष संदर्भ में). Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):145-152.

Cite(Electronic):
रत्नेश्वर प्रसाद द्विवेदी, सोयेबा सना अंसारी. जीवन बीमा कम्पनियों में ग्राहक संतुष्टि-भारतीय जीवन बीमा निगम एवं बजाज एलियांज का तुलनात्मक अध्ययन (रीवा जिले के विशेष संदर्भ में). Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):145-152.   Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2020-8-4-5


संदर्भ ग्रन्थ सूची:-
1ण्    वर्मा नरेश कुमार- ‘‘जीवन बीमा का वैधानिक पक्ष’’ आई.सी., 24 वर्ष 1999- यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड मुम्बई।
2ण्    वर्मा नरेश कुमार- ‘‘जीवन बीमा के प्रयोग’’ आई.सी., 23 वर्ष 1999 (अप्लीकेशन आॅफ लाइफ इंश्योरेन्स)  यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड मुम्बई, वर्ष 1999।
3ण्    भारद्वाज नरेश चन्द्र- ‘‘बीमा के सिद्धान्त’’ आई.सी. 01 यूनिवर्सल इश्योरेन्स बिल्डिंग  सर फिरोजशाह मेहता, रोड़ मुम्बई।
4ण्    श्री शशिकान्त- जीवन बीमा व्यवसायः रूपरेखा’’ आई.सी. 33 वर्ष 2000 यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड़ मुम्बई।
5ण्    श्री शशिकान्त- ‘‘जीवन बीमा के सिद्धान्त एवं व्यवहार’’, आई.सी. 30
6ण्    पाठक उमेश चन्द्र- ‘‘जीवन बीमा संस्करण’’ यूनिवर्सल इंश्योरेन्स बिल्डिंग सर फिरोजशाह मेहता, रोड मुम्बई।
7ण्    सारस्वत महेश- ‘‘बीमा प्रेरणा शक्ति (उपकार)’’ उपकार प्रकाशत 2/11 ए. स्वदेशी बीमा नगर आगरा।

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