Author(s): के. एस. गुरूपंच

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Address: के. एस. गुरूपंच प्राचार्य, एम. जे. महाविद्यालय, भिलाई (छ.ग.)

Published In:   Volume - 2,      Issue - 4,     Year - 2014


ABSTRACT:
व्यंग्य हिन्दी साहित्य की अमूल्य विधा है,व्यंग्य विधा के माध्यम से हम सामाजिक,आथर््िाक,एवं राजनैतिक जीवन में व्याप्त विसंगतियांे पर सीधा प्रहार करते हैं। व्यंग्य जहाॅं हंॅसी के पुट विद्यमान होते हैं,वही वह व्यवस्था मंे व्याप्त समस्याओं को उजागर कर शासन प्रशासन का ध्यान समस्याओं की ओर इंगित करता है। आधुनिक समय मंे हमारे जीवन के हर क्षेत्र मंे समस्याएॅ इतनी बढ़ चुकी है, कि उन्हे प्रत्यक्ष कहना अपने आप मंे संभव नही है,ऐसी स्थिति में व्यंग्य एक बहुत बडा अभिकरन है। व्यंग्य ववस्था पर कटाक्ष है, यह समस्याओं को तार-तार कर अर्थात बडी बारीकी से प्रस्तुत करता है। ताकि स्रोता, पाठक या दर्शक देखकर, पढ़कर या सुनकर मनोरंजनात्मक हॅसी से लोटपोट होकर व्यवस्था में व्याप्त समस्याओं से साक्षत्कार कर लेता है, तथा व्यंग्यकार व्यंग्य के माध्यम से समस्याओं का समाधान भी प्रस्तुत करता है, यही कारण है, कि आधुनिक हिन्दी जगत में व्यंग्य का महत्व दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। ।


Cite this article:
के. एस. गुरूपंच. भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रभाव . Int. J. Ad. Social Sciences 2(4): Oct. - Dec. 2014; Page 235-237.

Cite(Electronic):
के. एस. गुरूपंच. भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रभाव . Int. J. Ad. Social Sciences 2(4): Oct. - Dec. 2014; Page 235-237.   Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2014-2-4-9


संदर्भ:
1.       Bhartiya Arthvyavastha, Ramesh Singh,Publisher-Tata McGraw-Hill Education,ISBN0070655510, pp-218
2.       Samanya Adhyayan Paper  2012, Tmh, Publisher-Tata McGraw-Hill Education, ISBN 0071332065, pp-12
3.       Economic History of Modern India, Shreedhar Pandey, Publisher-Motilal Banarsidass, ISBN 8120834658, pp-782
4.       Statistics for Economics, T.K. Jain,Publisher,VK PUBLICATIONS, ISBN 9380735537,pp 91
5.       Vishav Vayapar Sangathan Tatha Bhartiya Arthvayavastha (in Hindi), Ram Naresh Pandey, Publisher-Atlantic Publishers and Dist, 2004, ISBN 8126903678, pp 121

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