Author(s): रामरतन चैधरी

Email(s): umeshmishra7843@gmail.com

DOI: Not Available

Address: रामरतन चैधरी
शोधार्थी (हिन्दी), वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर (उ0प्र0)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 9,      Issue - 3,     Year - 2021


ABSTRACT:
रसलीन रीतिकालीन कवि है। रीति एक परंपरा का नाम है। जिसके अंतर्गत श्रृंगार रस प्रधान रस के रूप में है। श्रृंगार रस वर्णन की परंपरा प्राकृत काव्य से होती हुई आदिकाल में आती है। आदिकाल के पश्चात वह भक्तिकाल के काव्य में निगर्मित होती है।


Cite this article:
रामरतन चैधरी. रसलीन और श्रृंगार रस. International Journal of Advances in Social Sciences. 2021; 9(3):142-5.

Cite(Electronic):
रामरतन चैधरी. रसलीन और श्रृंगार रस. International Journal of Advances in Social Sciences. 2021; 9(3):142-5.   Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2021-9-3-3


सन्दर्भ ग्रन्थ सूची
1ण्    रसलीन ग्रन्थावलीः - रस प्रबोध, दोहा 60
2ण्    वही दोहा 65-सं. सुधाकर पाण्डेय काशी नगरी, पचरिणी सभा वाराणसी, सं. 2-44 वि.
3ण्    भरतमुनिः नाटकशास्त्र, 7/9,सं. बाबूलाल शुक्ल चैखम्भा संस्कृति संस्थान वाराासी सं.वि. 2067
4ण्    रसलीन ग्रन्थावली - रस प्रबोध, दोहा 66
5ण्    वही, दोहा 67-68
6ण्    रसलीन ग्रन्थावली - रस प्रबोध, दोहा 50
7ण्    वही, दोहा 50
8ण्    वही, दोहा 50
9ण्    रसलीन ग्रन्थावली - रस प्रबोध, दोहा 673-76
10ण्   रसलीन ग्रन्थावली-रस प्रबोध, दोहा 51
11ण्   आचार्य विश्वनाथ: साहित्य दर्पण, 31/132ए सं. शालिग्राम शास्त्री मोतीलाल बनारसीदास चैक वाराणसी, सं. नवम् संस्करण 1977

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