ABSTRACT:
प्रस्तुत शोध पत्र में छत्तीसगढ़ के उत्तर-पश्चिम में स्थित मैकाल पर्वत श्रेणी में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजाति ‘‘बैगा’’ बच्चों में पोषण स्तर को ध्यान में रखते हुए ‘‘आदिवसी बच्चों में पोषण स्तर का अध्ययन भौगोलिक परिप्रेक्ष्य में किया गया है। किसी भी समुदाय के निवास, उसके विकास व अन्योन्य क्रियाओं के सम्पादन में भौगोलिक कारक महत्वपूर्ण होता है। कबीरधाम जिला छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासियों का प्रमुख निवास स्थान है। मैकाल श्रेणी में अवस्थिति होने के कारण ये राज्य के सुविधा सम्पन्न मैदानी भाग से दूर है। जिले में कई ऐसे सुविधाविहीन ग्राम है जहाँ पहुंचने के लिए पक्की सड़के नहीं है। केन्द्र व राज्य शासन के विभिन्न जनजातीय विकास कार्यक्रमों के फलस्वरूप शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ अभी बैगा ग्रामों तक बहुत मुश्किल से पहुँच पाया है, जिसके कारण ये बैगा समुदाय अभी भी स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी समस्याओं से ग्रस्त है विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों में पोषण की कमी है। अध्ययन प्रस्तुत अध्ययन में प्राथमिक एवं द्वितीयक आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। प्राथमिक आंकड़ों के संकलन हेतु ऐसे बैगा परिवार जिनके घर में 06 माह से 05 वर्ष तक की आयु वाले बच्चे हैं, ऐसे कुल 30 परिवारों को उत्तरदाता के रूप में चयन किया गया है। कुपोषण स्तर की जांच करने के लिए MUAC (Mid-Uppar Arm Circulation) अर्थात् ऊपरी भुजा परिधि का प्रयोग किया गया है। शोध प्रविधि के अंतर्गत यह शोध पत्र निदानात्मक शोध प्ररचना के अंतर्गत है। अध्ययन के पश्चात् निष्कर्ष में यह प्राप्त हुआ कि इस समुदाय के बच्चों को गुणवत्तायुक्त आहार एवं पोषण प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा आंगनवाड़ी की सहायता से रेडी-टू-इट पावडर, गुड़-चना, फल्लीदाना चिक्की इत्यादि के माध्यम से पोषण देने का प्रयास किया जा रहा है। इसके बाद भी बैगा बच्चों को जन्म से पोषण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि परिवारिक सदस्यों में विशेषकर बच्चों के माताओं की शिक्षा का स्तर निम्न है। निम्न शैक्षणिक स्तर से स्वास्थ्यगत् समस्याओं को समझने में कठिनाई होती है। बच्चों के अस्वस्थता के लक्षण को नहीं समझ पाती है और उपचार के स्थान पर अंधविश्वास के कारण झाड़फूंक इत्यादि पर विश्वास कर बैठती है। साथ ही परिवार के अन्य सदस्य निम्न आर्थिक स्थिति के कारण जीवकोपार्जन में संलग्न होते हैं, जिससे वे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान नहीं दे पाते हैं, परिणामस्वरूप बच्चों की औसत ऊँचाई, वजन तथा बौद्धिक विकास व क्षमता प्रभावित होता है, उनका स्वास्थ्य और बौद्धिक स्तर अपेक्षाकृत निम्न होता है।
Cite this article:
देवेन्द्रधर द्विवेदी, तामेश्वरी. कबीरधाम जिले के जनजातीय बच्चों में पोषण स्तर: एक भौगोलिक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):31-5. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00008
Cite(Electronic):
देवेन्द्रधर द्विवेदी, तामेश्वरी. कबीरधाम जिले के जनजातीय बच्चों में पोषण स्तर: एक भौगोलिक अध्ययन. International Journal of Advances in Social Sciences. 2026; 14(1):31-5. doi: 10.52711/2454-2679.2026.00008 Available on: https://ijassonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-8
संदर्भ ग्रंथ सूची:
1. आत्राम, विरशहा ‘‘आदिवासियों में कुपोषण की समस्या और कुपोषण के उपाय’’ ए.जी.पी.ई. द रॉयल गोण्डवाना रिसर्च जर्नल ऑफ हिस्ट्री, साइंस, इकोनॉमिक, पॉलिटिकल एवं सोशल साइंस, अंक-01, भाग-01, मार्च; 2019, पृ. 80-83.
2. दीपाविन्ता, गीता नियोगी, 21 जनवरी, 2022, राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़, 101reporters.com
3. यादव, सी.पी., हुसैन, एस.एस.ए., पासी, एस. एवं शर्मा, ए. ‘‘भारत के सह-स्थानिक क्षेत्रों में मलेरिया और कुपोषण के बीच संबंध’’ बी.जे.एम.ग्लोबल हेल्थ, 08 जनवरी, 2023.
4. खान, इरशाद एवं नायक, जयंत कुमार ‘‘छत्तीसगढ़ के विशेष पिछड़ी जनजाति ‘‘पहाड़ी कोरवा’’ के बच्चों में कुपोषण की स्थिति: एक मानवमितीय अध्ययन’’ इंटरनेशनल जर्नल ऑफ अप्लाइड रिसर्च, अंक-2, भाग-11, 2016, पृ. 312-316.
5. मित्रा, मिताश्री, कुमार, पी. वी., चक्रवर्ती, एस. एवं भारती, प्रेमानन्द (2007) ‘‘छत्तीसगढ़ में कमार जनजाति के बच्चों में पोषण की स्थिति’’ इंडियन जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक्स, खण्ड-74, 25 मई 2007, पृ. 381-384.
6. कांजीलाल, करण एवं अन्य ‘‘भारत में बच्चों की पोषण स्थिति - घरेलू सामाजिक-आर्थिक स्थिति संदर्भगत निर्धारक के रूप में’’ अंतर्राष्ट्रीय जर्नल ऑफ इक्वालिटी हेल्थ; अगस्त, 2010. वेबसाइट https://pubmed.ncbi.nlm.gov
7. बैगा विशेष पिछड़ी जनजाति का आधारभूत सर्वेक्षण प्रतिवेदन, आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर (छ.ग.) 2020, पृ. 14.