Author(s): देवेन्द्र कुमार, अब्दुल सत्तार, भारती कुलदीप

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Address: डाॅ. देवेन्द्र कुमार1, डाॅ. अब्दुल सत्तार2, श्रीमती भारती कुलदीप3
1प्राध्यापक, कलिंगा विष्वविद्यालय, नया रायपुर.
2विभागाध्यक्ष, कमला नेहरू, महाविद्यालय, कोरबा.
3सहायक प्राध्यपिका, कमला नेहरू, महाविद्यालय, कोरबा.
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 8,      Issue - 4,     Year - 2020


ABSTRACT:
पलायन या प्रवास एक सार्वभौमिक तथ्य है। दुनिया के प्रत्येक समाज में किन्हीं न किन्हीं कारणों से प्रवास की प्रवृत्ति आवश्यक रूप से देखा जा सकता है। प्रवास के कारण भी अनेक हो सकते हैं, कभी प्रवास का कारण धार्मिक यात्रा या तीर्थांटन होता है तो कभी उच्च षिक्षा, रोजगार युद्ध, अकाल व महामारी जनसंख्या के बड़े पलायन का कारण बनती है। कारण के अनुरूप ही हमें इसका प्रभाव भी समाज में सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों ही रूपों में देखने को मिलता रहा है। जहाँ सकारात्मक प्रवास के प्रभाव भी सकारात्मक होते है, वहीं विपत्ति एवं आपदा में किये जाने वाले प्रवास का नकारात्मक प्रभाव भी समाज पर पड़ता है। भारत में प्रवास की प्रकृति को अभी तक मूल रूप से प्राकृतिक आपदा, गरीबी और भूखमरी से जोड़कर देखा जाता रहा है। इसका कारण भी वाजिब है, क्योंकि भारत की जनगणना 2001 के अनुसार देष की कुल आबादी का 26 प्रतिषत भाग गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन करता है और प्रवास का संबंध इस बड़े भाग से रहा है। भारत में जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार देष की कुल जनसंख्या 121.02 करोड़ आंकलित की गयी है जिसमें 68.84 प्रतिषत जनसंख्या गांवों में निवास करती है, जबकि 31.16 प्रतिषत की आबादी षहरों में निवास करती है। स्वतंत्र भारत के प्रथम जनगणना 1951 में गांवों और षहरों की आबादी का अनुपात 83 प्रतिषत एवं 17 प्रतिषत था। आजाद भारत के छः दषक बाद 2011 की जनगणना में गांवों और षहरों की जनसंख्या का प्रतिषत 70 एवं 30 प्रतिषत थी। इन आंकडों से स्पष्ट होता है,कि भारत में गांव के व्यक्तियों का षहरों की ओर पलायन बढ़ रहा है।


Cite this article:
देवेन्द्र कुमार, अब्दुल सत्तार, भारती कुलदीप. पलायन करने वाले श्रमिक परिवारों के समाजिक - आर्थिक स्थिति का उनके बच्चों की षिक्षा पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन (जाॅंजगीर-चापां जिले के विषेष संदर्भ में). Int. J. Ad. Social Sciences. 2020; 8(4):207-214.


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