Author(s): संगीता षुक्ला, षैलेश कुमार चैबे

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Address: डाॅ.संगीता षुक्ला1, डाॅ. षैलेश कुमार चैबे2 1सहा.प्राध्यापक भूगोल, षास.कन्या.स्वषासी.स्नातक.महाविद्यालय, बिलासपुर (छ.ग.) 2व्याख्याता पंचायत, षास.कन्या.हाई.स्कूल, बैमा, बिलासपुर (छ.ग)

Published In:   Volume - 4,      Issue - 3,     Year - 2016


ABSTRACT:
भारत में लगभग 1/5 भाग (19 प्रतिषत) क्षेत्र में 500 से अधिक आदिवासी समुदाय निवास करते है। प्रत्येक आदिवासी समुदाय की अपनी विषिश्ठ सांस्कृतिक धरोहर, बोली, उपबोली, एवं रस्मो - रिवाज है। यही विषिश्ठता प्रत्येक आदिवासी समुदाय की पहचान है। छत्तीसगढ़ अंचल जनजाति बहुल प्रदेष है। यहाॅं कुल जनंसख्या का 32 प्रतिषत आबादी जनजातियों का है, जो प्रदेष के उत्तरीय एवं दक्षिणी भाग के पहाड़ी वनाच्छादित क्षेत्र एवं दुर्गम अंचलों में निवास करती है। पहाड़ी ’’कोरवा’’ उत्तर छत्तीसगढ़ प्रदेष में उत्तरीय -पष्चिमी एवं पूर्वी भाग में वनोच्छादित प्रदेष में स्वच्छ एवं प्रकृति प्रेमी के रूप में निवासरत है। इनकी अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक रिति-रिवाज है, इनका अर्थ व्यवस्था पूर्णतः वनों पर आधारित है।


Cite this article:
संगीता षुक्ला, षैलेश कुमार चैबे. उत्तर छत्तीसगढ़ प्रदेष में आदिवासी अर्थव्यवस्था (कोरवा जनजाति के सामाजिक, आर्थिक स्तर के अध्ययन के संदर्भ में). Int. J. Ad. Social Sciences 4(3): July- Sept., 2016; Page 135-138


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